आर्य लेखक परिषद् एक परिचय

– आचार्य वेदप्रिय शास्त्री महर्षि दयानंद प्रज्ज्वलित अग्नि की ज्वाला वांछित आवश्यक समिधा, सामग्री और घृत के अभाव में शनै:-शनै: शीतल होती हुई अपनी पहचान ही खोती जा रही है । वह अग्नि जिसे कभी एंड्रोजैक्सन ने संसार के पाप…