साथी कहो! कहाँ से लाऊँ ?

सोए युग की आँख खोलकर, मादकता में जहर घोल दे । दानवीय कारा में बन्दी, मानवता के पाश खोल दे ।। ऐसा गीत कहाँ से लाऊँ ।१।? साथी कहो! कहाँ से लाऊँ ? जो गिरते को सम्हाल लेवे, गिरे हुए…

उस रोगी को कौन बचाए, दवा समझता जो विष को

दुराचार उपदेश बने, व्यभिचार मुक्ति का द्वार हुआ। कविता बनी चरित्र हीनता, योगी सब संसार हुआ। जीव अधिकतर ब्रह्म हुए कामी कुत्ते भगवान बने। अश्लीलता संस्कृति बन गई और धूर्त विद्वान् बने। घोर अविद्या के पुतले शंकराचार्य कहलाते हैं। राग-…