पुरूषार्थ ही जीवन हैं |

ओउम् यह संसार पुरूषार्थीयों के लिए हैं| पुरूषार्थ ही जीवन हैं, प्रमाद ही मृत्यु हैं| जीवन में सफलता भाग्यवाद पर नही अपितु पुरूषार्थवाद पर निर्भर करती हैं| प्रतिपल की सजगता, जागरूकता के साथ जो आगे बढ़ते हैं, वे अपने जीवन…

मांसाहार पर चोट।

धर्म और ईश्वर के नाम पर जानवर काटे और खाएं जायेंगे, क्या ईश्वर में दया नाम का गुण नहीं है, क्या कोई मनुष्य चाहेगा कि उसकी संतान को या परिवार के सदस्य को मारा जाए, ऐसे में भला उस परमेश्वर…

आर्य लेखक परिषद् एक परिचय

– आचार्य वेदप्रिय शास्त्री महर्षि दयानंद प्रज्ज्वलित अग्नि की ज्वाला वांछित आवश्यक समिधा, सामग्री और घृत के अभाव में शनै:-शनै: शीतल होती हुई अपनी पहचान ही खोती जा रही है । वह अग्नि जिसे कभी एंड्रोजैक्सन ने संसार के पाप…